अनीता वर्मा को बनारसी
प्रसाद भोजपुरी सम्मान

हिन्दी कविता में विरल पहचान बनाने वाली कवयित्री अनीता वर्मा को गत ६ अप्रैल, २००८ को रांची के एच पी डी सी सभागार में उनके काव्य-संग्रह एक जन्म में सब के लिए वर्ष २००६ का बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान से सम्मानित किया गया । उन्हें यह सम्मान यहां आयोजित एक भव्य समारोह में कविवर लीलाधर जगूडी ने प्रदान किया । सम्मान प्रदान करते हुए जगूडी ने कहा कि अनीता की कविताएँ बाउंडरीलेस हैं और ये समाज की व्याधियों की शिनाख्त करती हैं।
इस अवसर पर मंगलेश डबराल ने कहा कि इनकी कविताएँ सारतात्विक हैं तथा इनमें अपूर्व दार्शनिक संयम है।
लीलाधर मंडलोई ने कहा कि अनीता वर्मा की कविताएँ दुःख का उत्सव मनाती हैं।

हिन्दी कविता में विरल पहचान बनाने वाली कवयित्री अनीता वर्मा को गत ६ अप्रैल, २००८ को रांची के एच पी डी सी सभागार में उनके काव्य-संग्रह एक जन्म में सब के लिए वर्ष २००६ का बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान से सम्मानित किया गया । उन्हें यह सम्मान यहां आयोजित एक भव्य समारोह में कविवर लीलाधर जगूडी ने प्रदान किया । सम्मान प्रदान करते हुए जगूडी ने कहा कि अनीता की कविताएँ बाउंडरीलेस हैं और ये समाज की व्याधियों की शिनाख्त करती हैं।
इस अवसर पर मंगलेश डबराल ने कहा कि इनकी कविताएँ सारतात्विक हैं तथा इनमें अपूर्व दार्शनिक संयम है।
लीलाधर मंडलोई ने कहा कि अनीता वर्मा की कविताएँ दुःख का उत्सव मनाती हैं।
अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि अनीता वर्मा का यह संग्रह जन्म-जन्मांतर की अवधारणा का निषेध करता है।
प्रखर समीक्षक ओम निश्चल ने कहा कि एक जन्म में सब की कविताओं की गंध, रूप, रस और छुअन औरों से अलग है तथा इनका शिल्प ऐसा है जैसे सांगीतिक बंदिशों में उपनिबद्ध हो।
इस मौके पर आलोचक खगेन्द्र ठाकुर, वागर्थ के सम्पादक एकांत श्रीवास्तव, कवयित्री कात्यायनी व निर्मला पुतुल ने भी अपने विचार रखे। अनीता वर्मा ने अपनी प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया और अपने वक्तव्य में कहा कि कविता मेरे लिए जीवन की तरह ही पवित्र, सुंदर और निष्कलुष है।
कार्यक्रम का संचालन ओम निश्चल ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन संयोजक अरविंद कुमार ने किया ।



3 comments:
बधाई पहुंचाइए अनीता जी तक.
हमारी तरफ़ से भी बधाई!
मैंने उनका यह काव्य संग्रह हाल ही में पढ़ा और पढ़कर अवाक हूं। यह विरल संग्रह है। उन्हें बधाई और शुभकामनाएं।
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