रसोईघर
खाने की मेज पर
बिल्कुल शांत बैठी है बिल्ली
सोचती हुई
भाप छोड़ती मछली के बारे में
आसपास पड़े हैं
तीन अदद चेरी
बिल्कुल शांत और चुपचाप
बेचैन और उद्विग्न
हो जाती है इस मौन से
रसोईघर की आलमारी में पड़ी मछली
राजी-खुशी
चिल्लाकर वह कहना चाहती है :
'ईश्वर के लिए आख़िर कुछ टू कहो'
चालाक है
इसलिए ऐसा कहती नहीं
क्योंकि अगर चिल्लाती है
ढूंढ ली जाएगी वह
और चुप रहती है अगर
जान नहीं पाएगा कोई
उसका ठिकाना
सब शांत हैं इसलिए
बिल्ली, चेरी और मछली
कराहती है
बस कभी-कभार
खाने की केवल मेज
अनुवाद : योगेन्द्र कृष्णा




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